असर हो रहा हैं,
तेरी मौजूदगी का,
असर हो रहा हैं,
धीमी सी आंच पर पकते इश्क का,
तेरी मौजूदगी का,
असर हो रहा हैं,
धीमी सी आंच पर पकते इश्क का,
असर हो रहा हैं,
तेरी हर आदत का,
असर हो रहा हैं,
उस मुलाकात की रात का,
असर हो रहा हैं,
वो रस मे डूबी तेरी उस बात का,
असर हो रहा हैं,
तेरे हाथो की वो तेढी-मेढी लकीरो का,
असर हो रहा हैं,
उन उंगलियो का जिन्होने थामा था हाथ मेरा
असर हो रहा हैं,
लबो को खोलती तेरी उस मुस्कान का,
असर हो रहा हैं…..
उन उंगलियो का जिन्होने थामा था हाथ मेरा
असर हो रहा हैं,
लबो को खोलती तेरी उस मुस्कान का,
असर हो रहा हैं…..
(चिराग)