भारतीय क्रिकेट टीम ने 13 जुलाई 2002 को
नेटवेस्ट सिरीज़ के फाईनल मे इंग्लैड को हराकर एक शानदार जीत दर्ज की थी. इस जीत को
अब तक की सबसे यादगार जीत मे शामिल करा गया हैं. 13 जुलाई 2012 को उस जीत को 10
साल हो गये थे. मैंने देखा उस दिन इस जीत को लेकर फेसबूक पर कई लोगो ने सौरव
गांगुली की वो फोटो लगाई थी. जिसमे उन्होने जीत के बाद अपनी शर्ट को उतारकर
लार्ड्स की गैलैरी से लहराया था. साथ ही कई लोगो ने उस जीत के हीरो कैफ और युवराज़
को भी याद करा था.ये जीत सच मे काफी ऐतिहासिक थी. फाईनल मे इंग्लैड ने टास जीतकर
पहले बल्लेबाजी की और कप्तान नासिर हुसैन और ट्रेस्कोथीक के शतको की बदैलत 326 रन
का पहाड जैसा लक्ष्य भारत के सामने रखा था . जिसके जवाब मे भारत की पारी 24 ओवर्स मे
146-5 पर लडखडा रही थी. उसी वक्त दो युवा कैफ और युवराज़ ने अपनी जिम्मेदारी
सम्भाली और भारत को 2 विकेट से जीत दिला दी थी.
भारत की क्रिकेट टीम जब जीतती हैं तो
देशभर मे जश्न मनाया जाता हैं और हारने पर ताने देने वाले भी कम नही होते हैं.
इसका कारण ये हैं के हम टीम से काफी उम्मीदे रखते हैं जो पूरी ना होने पर गुस्सा आ
जाता हैं.
बस कुछ दिनो मे ओलंपिक शुरु
होने वाले हैं और जिसमे भारत के खिलाडी दम खम से प्रदर्शन करेंगे.अगर किसी ने मेडल
जीता तो हम उसे वाह वाही देंगे और अगर जो खाली हाथ वापस आयेगा उसे आलोचना के सिवा
और कुछ नही मिलेगा. पर सोचिये जिस तरह से 10 साल बाद भी हम नेट्वेस्ट सिरीज़ की जीत
के नायको को याद करते हैं. क्या उसी तरह से हम कर्णम
मल्लेशवरी,राज्यवर्धन सिह राठौर,लिएडर पेस,अभिनव बिंद्रा जैसे खिलाडी जिन्होने भारत के लिये ओलंपिक मे पदक जीता था.
जब हम इन्हे सिर्फ जीत के बाद भुला देते
हैं तो इनकी नाकामयाबी पर उंगली उठाने का हमे कोई हक नही हैं.
चलिये आज इस पोस्ट मे हम उन खिलाडीयो और उस पल को याद करेंगे
जिन्होने भारत को ओलंपिक मे पदक दिलाया
हैं.
1.
नोर्मल गिलबर्ट
प्रिटकार्ड ने 1900 के समर ओलंपिक
मे भारत के लिये 2 रजत पदक जीते थे. वो 200 मीटर दौड और 200 मीटर हर्डल दौड मे
दुसरे स्थान पर रहे थे. भारत और एशिया की तरफ से ओलंपिक मे भाग लेने वाले वो पहले
ऐथिलिट थे. 23 जून 1877 को कल्कत्ता(अब कोलकाता) मे जन्मे नोर्मल1905 मे इंग्लैड
चले गये थे.
इंटरनेशनल एसोसिएशन आफ ऐथेलेटिक फेडरेशन ने
2005 मे नोर्मल को ब्रिटेन का नागरीक बताकर ये पदक इंग्लैड के नाम कर दिया था.
परंतु इंटरनेशनल ओलंपिक कमीटी ने आज भी ये पदक भारत के नाम ही रखे है.
2. खाशाबा दादासाहेब
जाधव ने 1952 के ओलंपिक मे फ्री स्टाईल
कुश्ती मे कांस्य पदक जीतकर भारत की झोली मे
कुश्ती का पहला पदक डाला था. 15 जनवरी 1926 को जन्मे दादासाहेब को “पाकेट डायनमो”
के नाम से भी जाना जाता था.
3.
लिएंडर पेस ने 1996
मे अटलांटा ओलंपिक खेलो मे भारत के 44 साल के पदक के सुखे को समाप्त करा
था. 17 जून 1973 को जन्मे पेस ने फरनांडो मेलिजेनी को हरा कर कांस्य पदक भारत के
नाम करा था. इसके पहले दादासाहेब ने 1952 मे कुश्ती मे कांस्य पदक जीता था.
4. कर्णम मल्लेशवरी ने
2000 के समर ओलंपिक खेलो मे कांस्य पदक जीतकर भारत की तरफ से पदक जीतने वाली
पहली महिला बन गई थी.उन्होने 110 किलो की वर्ग मे स्नैच और 130 किलो वर्ग मे क्लीन
और जर्क करके कुल 240 किलो का वजन उठाया था.
1 जून 1975 को जन्मी
कर्णम मल्लेशवरी के अलावा कोई भी भारतीय महिला खिलाडी अब तक ओलंपिक खेलो मे
पदक जीतने मे कामयाब नही रही हैं.
5. नार्मल के बाद से भारत की झोली मे रजत पदक को आये
100 साल से ज्यादा हो गये थे. तभी देश के एक कर्नल ये सुखा समाप्त करने का बीडा
उठाया और 2004 के समर ओलंपिक
खेलो मे डबल ट्रेप शूटिंग मे रजत पदक जीत लिया.उस शुरवीर का नाम हैं कर्नल राज्य
वर्धन सिह राठौर, 29 जनवरी 1970 को जन्मे राठौर ने
आजादी के बाद भारत को ओलंपिक खेलो का पहला रजत पदक दिलाया था.
6. पूरूष हाकी मे एक
वक्त पर भारत की तूती बोलती थी. हर टीम भारत से खेलने मे घबराती थी. पूरूष हाकी टीम
ने अब तक भारत की झोली मे 8 सोने के सिक्के, 1 चांदी का और 2 कांस्य के सिक्के समेत
कुल 11 ओलंपिक
मेडल डाले हैं. 1928 के एमस्टरडम मे आयोजित हुये ओलंपिक खेलो से लेकर 1956 मे
मेलबोर्न मे हुये ओलंपिक खेलो मे लगातार 6
बार भारत की पुरुष हाकी टीम ने सोने के सिक्के पर निशाना साधा था. 1980 मे मोस्को
मे हुये ओलंपिक खेलो मे पुरुष हाकी टीम ने सोने के सिक्के को जीतकर आखरी बार
ओलंपिक खेलो मे कोई पदक जीता हैं. सोने के इस सुखे को समाप्त होने मे भारत को 28
साल का इंतेजार करना पडा.
इस सुखे को समाप्त
करा शुटर अभिनव बिंद्रा ने , 28 सितंबर 1982 को जन्मे अभिनव ने
2008 मे बींजिंग मे आयोजित हुये ओलंपिक खेलो मे सोने के सिक्के पर निशाना
साधा.उन्होने 10 मीटर एयर राईफल मे सोने पर निशाना लगाया.
7. अभिनव बिंद्रा के
प्रदर्शन बाकी भारतीय खिलाडीयो के जोश को भी बढा दिया था.जिसका नतीज़ा भारत को कुश्ती मे देखने को मिला.2008 के ही ओलंपिक
खेलो मे भारत के पहलवान सुशील कुमार सोलंकी ने फ्रि स्टाईल कुश्ती के 66 किलो वर्ग
मे कांस्य पदक जीतकर भारत की झोली मे दादासाहेब के बाद कुश्ती मे दुसरा पदक डाल दिया
था. 26 मई 1983 को जन्मे सुशील ने कजाकिस्तान के लियोनिड स्पीरीनीडोव को हराकर ये पदक
जीता था.
8.
2008 मे पदक जीतने का
ये सिलसिला यही नही थमा. भारत के युवा बाक्सर विजेंदर सिह ने इक्वेडोर के कार्लोस गोंगोरा
को हरा कर क्वाटर फाईनल मे प्रवेश कर लिया था. हालाकी वो वहा पर चुक गये परंतु बाक्सिंग मे क्वाटर फाईनल मे आने वाले बाक्सर को कांस्य पदक तो
मिलता ही हैं.29 अक्टूबर 1985 को जन्मे विजेंदर ने बाक्सिंग का पहला पदक भारत के नाम
कर दिया था.
इस बार फिर भारत की टीम जोश के साथ इंग्लैड
रवाना हो गई हैं, अभिनव बिंद्रा,सुशील कुमार और विजेंदर सिह से एकबार फिर पदक
की उम्मीद रहेंगी. साथ ही इस साल से पहली बार महिला बाक्सिंग भी शामिल करा हैं, जिसमे मणिपूर की रहने
वाली 5 बार की विश्व विजेता “ मेरीकाम ” भी भाग ले रही हैं.
चाहे
पदक मिले या ना मिले हर खिलाडी का हौसला हमे बढाना हैं और विश्व को ये बताना हैं के
हम सिर्फ क्रिकेट के खिलाडीयो का साथ नही देते हमारे देश मे हर खेल और खिलाडी को एक
नज़र से देखा जाता हैं.

इतनी विस्तृत जानकारी आपकी इस खेलों में रुचि को दर्शाती है. जानकारी से भरा सुंदर आलेख. केवल क्रिकेट ही नहीं बल्कि अन्य खेलों को भी प्रोत्साहन देना हमारा नैतिक कर्तव्य है.
ReplyDeletethanks for comment sir,
ReplyDeletekaafi shauk hain cricket aur sports ka to jaankari rakhne mein maja bhi aata hain
aur fir olympic mein medal jitane valo ko bhul kaise jaye hum