They like to read my Life

Tuesday, October 4, 2011

सीधे दिल से

हर शाम सुहानी हैं 
कुछ बातें पुरानी हैं 
हर लम्हे याद आते हैं 
उन शरारतो की डोरी आज भी साथ हैं 

चंद कदम और चलते ,
थोडा होसला और दिखाते 
डर को अगर दूर भगाते 
तो उस पार हम पहुच जाते 

मायने बदलने की चाह थी 
रास्ते बनाने की चाह थी 
अगर उनका प्यार साथ होता 
तो अब तक कई शहर बना चुके होते 

वो खामोश निगाहे 
वो कुछ कहने के लिए 
खुलते हमारे लब
काश ये चंद पंक्तिया उस दिन लिख देते 
तो शायद आज अकेले नहीं होते 
(चिराग)