हर शाम सुहानी हैं
कुछ बातें पुरानी हैं
हर लम्हे याद आते हैं
उन शरारतो की डोरी आज भी साथ हैं
चंद कदम और चलते ,
थोडा होसला और दिखाते
डर को अगर दूर भगाते
तो उस पार हम पहुच जाते
मायने बदलने की चाह थी
रास्ते बनाने की चाह थी
अगर उनका प्यार साथ होता
तो अब तक कई शहर बना चुके होते
वो खामोश निगाहे
वो कुछ कहने के लिए
खुलते हमारे लब
काश ये चंद पंक्तिया उस दिन लिख देते
तो शायद आज अकेले नहीं होते
(चिराग)