इश्क क्या हैं कहते हैं "एक आग का दरिया हैं और डूब के जाना हैं ".सच पूछे तो इश्क यही हैं .हर मोड़ पर परेशानी हैं पर इन परेशानियो से पार पा कर जो सुख मिलता हैं .उसका नशा ही अलग होता हैं .खेर मैं यहाँ आज इश्क के दो अलग-अलग पहलु बताना चाहता हूँ .
हमें बचपन से सिखाया जाता हैं के हमें सबसे हिलमिल कर रहना चाहिए .सबसे प्यार करो किसी से कोई गिला शिकवा न रखो .बचपन में जब हम झगड़ते थे ,हमारे माता पिता कहते थे बेटा लड़ाई ना करो सबसे प्रेम से रहो .
इसी तरह की बातें सुनते सुनते जब हम बड़े हो जाते हैं .तब हमें इश्क होता हैं .फिर हर तरह की मुश्किल को हम सहने को तैयार रहते हैं और उस वक़्त हमारे माता पिता हमारे इश्क का विरोध करते हैं .जो समाज हमेशा मिलजुल कर रहने के गीत गाता था वो अचानक हमारे इश्क के खिलाफ हो जाता हैं .बात सिर्फ इतनी सी हैं के बचपन में जब हमें कहा जाता हैं सबसे मिलकर रहो ,प्रेम से रहो तो फिर जवानी में उस इश्क का विरोध क्यों होता हैं .खेर ये एक पहलु था जो की बच्चो की तरफ से था .
आइये एक और पहलु की बात करते हैं जिसमे बच्चे खुद गलत होते हैं .
इश्क करना बुरी बात नहीं हैं ,परन्तु इस ज़माने में सिर्फ इश्क से किसी का पेट नहीं भरता हैं .आजकल के बच्चे अपना भविष्य बाद में बनाते हैं .इश्क पहले करते हैं .फिर जिद करते हैं .माना इश्क होता नहीं हो जाता हैं .परन्तु इश्क के बाद जब आप उस हमसफ़र के साथ जिंदगी बिताने का फैसला कर लेते हो तो क्या ये सोचते हो के आप दोनों इतने सक्ष्म हो के अब अपना गुजारा कर लोगे और शायद यही कारण हैं के माता पिता इश्क का विरोध करते हैं .अगर आप और आपका हमसफ़र अपने पैरो पर खड़ा हो जाये तो कई सारे माता पिता आपके इश्क का विरोध नहीं करेंगे ,हमें ये समझना चाहिए के पश्चिम में जैसे ही बच्चा १२-१३ साल का होता हैं ,उसे बोल दिया जाता हैं के अब वो कोई काम धंधा भी करे पढाई के साथ ,ताकि कम से कम अपना खर्च भी निकल ले लेकिन ये हमारे यहाँ नहीं हैं .इसीलिए पश्चिम में इश्क का विरोध नहीं होता हैं .खेर वहा विरोध ना होने के और भी कारण हैं .
इश्क खुदा की इबादत हैं पर इबादत से किसी को या अपने आप को भी ठेस ना पहुचे ये हमेशा ध्यान रखना चाहिए .
अंत में फिल्म "मेरे ब्रदर की दुल्हन " का ये गीत याद आता हैं "कैसा ये इश्क हैं ......अजब सा रिस्क हैं "