महक जुल्फों की ऐसी थी उनके ,
लड़खड़ागए कदम हमारे ,
कायनात ने मुझसे कहा अच्छी थी ना वो तन्हाई
खुशबू आंधी की तरह आई
नशे में चूर हो कर गिर गए हम
कायनात ने मुझसे कहा अच्छी थी ना वो दवाई (शराब )
गिराने का कोई गम नहीं
गिरते तो रोज़ हैं
फर्क सिर्फ इतना सा हैं
रोज़ ज़मीन पर गिरते थे
आज खुबसूरत दल दल में गिरे हैं
कायनात ने मुझसे फिर कहा
अच्छी थी ना वो जुदाई
(चिराग )